सड़क के गड्ढे ने छीनी मासूम की सांस सुमेरपुर उपखंड प्रशासन की घोर लापरवाही आई सामने
सुमेरपुर में प्रशासनिक लापरवाही का खौफनाक चेहरा : “मौत का कुंड” बना जूना जाखोड़ा रोड, एक मासूम की जान गई तब टूटी अफसरों की नींद, सड़क बीचों-बीच खोदकर छोड़ दी, महीनों तक नहीं हुई मरम्मत

हादसे के बाद फूटा जनाक्रोश — “ये दुर्घटना नहीं, सरकारी लापरवाही से हुई हत्या”
- विकास के दावों पर उठे सवाल, जनता बोली — नेताओं को सिर्फ वोट चाहिए, जनता की जान नहीं
(पुखराज कुमावत की रिपोर्ट)
सुमेरपुर, पाली। सुमेरपुर का जूना जाखोड़ा रोड सोमवार सुबह एक मासूम की जिंदगी निगल गया। श्मशान घाट जाने वाले मुख्य मार्ग पर सड़क के बीच बने गहरे और जानलेवा गड्ढे ने पानी के टैंकर के साथ जा रहे ट्रैक्टर को ऐसा झटका दिया कि उस पर बैठा एक बालक नीचे गिर पड़ा और टैंकर की पिछले पहिए के नीचे आने से उसकी दर्दनाक मौत हो गई।
घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया। मौके पर मौजूद लोगों ने सीधे तौर पर प्रशासन, संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों को कटघरे में खड़ा कर दिया। लोगों का कहना था कि यह हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही से हुई “सरकारी हत्या” है।
सड़क नहीं, मौत का जाल बन चुका है जूना जाखोड़ा रोड
स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क को बीच से खोदकर महीनों से अधूरा छोड़ दिया गया था। बारिश और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण वहां विशाल गड्ढा बन गया, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदकर बैठा रहा, और घटनाओं को देखकर तमाशा देखते रहा।
यह वही सड़क है जहां से रोजाना स्कूली बच्चे, ग्रामीण, महिलाएं, किसान और अंतिम यात्राएं गुजरती हैं। लोगों ने आक्रोश जताते हुए कहा —
“श्मशान घाट जाने वाली सड़क अब लोगों को सीधे श्मशान पहुंचा रही है।”
इलाके के लोगों का आरोप है कि इस मार्ग पर आए दिन बाइक सवार गिरते हैं, वाहन फंसते हैं और छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं, लेकिन प्रशासन को तब तक कुछ दिखाई नहीं देता जब तक किसी की जान नहीं चली जाए।
मीडिया चेतावनी देता रहा, अफसर फाइलों में सोते रहे
स्थानीय नागरिकों और मीडिया ने इस खतरनाक गड्ढे को लेकर कई बार प्रशासन को चेताया था।
दैनिक रणवीर राजस्थान और दैनिक जयपुर टाइम्स सहित स्थानीय पत्रकार लगातार खबरें प्रकाशित कर जिम्मेदार अधिकारियों को आगाह करते रहे कि यह सड़क कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। लेकिन जिम्मेदार अफसरों ने हर बार शिकायतों को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
अब जब एक परिवार का चिराग बुझ गया, तब प्रशासनिक अमला औपचारिक कार्रवाई और जांच की बात कर रहा है।
विकास के दावे ध्वस्त, जनता पूछ रही — जिम्मेदार कौन?
एक तरफ मंचों पर करोड़ों के विकास कार्यों के दावे किए जाते हैं, दूसरी ओर शहर की मुख्य सड़कें मौत का जाल बनी हुई हैं।
घटना के बाद लोगों का गुस्सा स्थानीय नेताओं पर भी फूट पड़ा।
लोगों ने कहा कि चुनाव के समय हर गली में घूमने वाले नेता अब जनता की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर पूरी तरह मौन हैं।
जनता अब सीधे सवाल पूछ रही है —
- सड़क खोदकर छोड़ने वाला विभाग कौन है?
- मरम्मत के नाम पर बजट कहां गया?
- आखिर प्रशासन को कार्रवाई के लिए मौत का इंतजार क्यों रहता है?
- इस मासूम की मौत का जिम्मेदार कौन होगा?
हादसे के बाद मचा हड़कंप, पुलिस पहुंची मौके पर
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। माहौल तनावपूर्ण हो गया और लोगों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई।
सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मौका मुआयना किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम करवाया तथा बाद में शव परिजनों को सौंप दिया। मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
जनता की मांग — अधिकारियों और ठेकेदार पर हो एफआईआर
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि मामले में केवल खानापूर्ति वाली जांच नहीं, बल्कि संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।
लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़क की मरम्मत नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल…
आखिर कब तक जनता गड्ढों में गिरकर मरती रहेगी?
और कब तक प्रशासन हर मौत के बाद सिर्फ जांच का ढोंग करता रहेगा?













