मनरेगा कार्य से लौटते समय वृद्ध महिला की तबीयत बिगड़ी, उपचार के दौरान मौत, ग्रामीणों ने की आर्थिक सहायता की मांग

मनरेगा कार्य से लौटते समय वृद्ध महिला की तबीयत बिगड़ी, उपचार के दौरान मौत
ग्रामीणों ने परिजनों को आर्थिक सहायता एवं सरकारी राहत दिलाने की मांग उठाई
- बनेड़ा/सरदार नगर | परमेश्वर दमामी
क्षेत्र के सरदार नगर गांव की 75 वर्षीय वृद्ध महिला श्रमिक धनी देवी माली, पत्नी स्वर्गीय उगमा माली, का उपचार के दौरान निधन हो जाने से गांव में शोक की लहर फैल गई। रविवार सुबह परिजनों एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार धनी देवी माली 29 मई (शुक्रवार) को पीनारो की नाड़ी क्षेत्र में संचालित मनरेगा कार्यस्थल पर मजदूरी करने गई थीं। दिनभर कार्य करने के बाद जब वह घर लौट रही थीं, तभी रास्ते में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। बताया जा रहा है कि भीषण गर्मी और तेज धूप के कारण उन्हें चक्कर आया और वह रास्ते में ही गिर पड़ीं।
घटना की सूचना मिलते ही परिजन एवं ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उन्हें तत्काल निजी वाहन से उपचार के लिए भीलवाड़ा ले जाया गया। वहां उन्हें महात्मा गांधी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उनका उपचार शुरू किया। दो दिनों तक चले उपचार के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका और शनिवार (30 मई) देर शाम उन्होंने अंतिम सांस ली।
धनी देवी के निधन की खबर मिलते ही सरदार नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक का माहौल छा गया। रविवार सुबह उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण, समाजजन और परिजन उपस्थित रहे। इस दौरान लोगों ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
गर्मी से बचाव के इंतजाम बढ़ाने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में इन दिनों भीषण गर्मी का दौर जारी है। ऐसे में मनरेगा सहित विभिन्न कार्यस्थलों पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए पर्याप्त छाया, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
प्रशासन से आर्थिक सहायता दिलाने की अपील
ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की जांच कर मृतका के परिजनों को नियमानुसार आर्थिक सहायता एवं सरकारी राहत प्रदान करने की मांग की है। उनका कहना है कि धनी देवी एक मेहनतकश महिला थीं और परिवार के भरण-पोषण में महत्वपूर्ण योगदान देती थीं। उनके आकस्मिक निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों ने शोकग्रस्त परिवार को शीघ्र सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।














