ग्रेटर नोएडा हत्याकांड: अंधविश्वास और रंजिश ने छीनी निर्दोष समाजसेवी नरेश प्रजापत की जान

ग्रेटर नोएडा हत्याकांड में हत्यारों को लालच देकर करवाया मर्डर
ग्रेटर नोएडा – उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के रोजा जलालपुर गांव से एक ऐसी दर्दनाक खबर सामने आई है जिसने पूरे समाज को झकझोर दिया है। यहां एक समाजसेवी और पूजा-पाठ करने वाले साधारण इंसान नरेश प्रजापति की हत्या अंधविश्वास और व्यक्तिगत रंजिश की भेंट चढ़ गई।
पूजा के बहाने रची गई साजिश
नरेश प्रजापति गांव में सामाजिक कामों और धार्मिक आयोजनों में हमेशा आगे रहते थे। गांव वाले उन्हें एक सरल और मददगार इंसान के रूप में जानते थे। लेकिन 2 अगस्त की शाम उनकी जिंदगी अचानक खत्म कर दी गई।
हत्यारों ने उन्हें पूजा कराने के बहाने बुलाया, स्विफ्ट कार में बैठाया और सुनसान इलाके में ले जाकर पहले गमछे से गला घोंट दिया। इतना ही नहीं, दरांती से उनके सिर पर कई वार किए और शव को बुलंदशहर की नहर किनारे फेंक दिया।
अंधविश्वास बना मौत का कारण
इस खौफनाक घटना के पीछे जो वजह सामने आई, उसने सबको हैरान कर दिया। गांव के ही युवक प्रवीण शर्मा को शक था कि नरेश ने तंत्र-मंत्र के जरिए उसकी पत्नी को अपने वश में कर लिया था। तीन साल पहले पत्नी का घर छोड़कर चले जाना उसके शक को और गहरा करता गया। इसी अंधविश्वास और गुस्से में उसने नरेश को खत्म करने की ठान ली।
भाड़े के हत्यारों को दिया लालच
हत्या की साजिश कोई अचानक नहीं बनी, बल्कि करीब तीन महीने पहले रची गई थी। प्रवीण ने अपने परिचित सुनील कुमार के जरिए नीरज, सौरभ और प्रवीन मावी को इस काम में शामिल किया। लालच भी चौंकाने वाला था – गाजियाबाद की वेव सिटी में सौ-सौ गज के प्लॉट और एक लग्जरी कार। इस लालच में आरोपियों ने नरेश की हत्या करने का जिम्मा ले लिया।
पुलिस मुठभेड़ और गिरफ्तारी
हत्या के बाद पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी रही। आखिरकार 14 अगस्त को चिपियाना बुजुर्ग इलाके में संदिग्ध कार रोकने की कोशिश की गई। लेकिन आरोपी भागने लगे। मुठभेड़ हुई और इसमें नीरज व सुनील गोली लगने से घायल हो गए, जबकि तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने मौके से हत्या में इस्तेमाल की गई कार, तमंचे, कारतूस, दरांती और नरेश का गमछा बरामद किया।
गांव में मातम और सवाल
नरेश प्रजापति की हत्या ने गांव के हर परिवार को हिलाकर रख दिया है। लोग उन्हें एक नेकदिल और मददगार इंसान के रूप में याद कर रहे हैं। परिवार पर गहरा दुख है, गांव में मातम का माहौल है।
यह घटना केवल एक हत्या की कहानी नहीं है, बल्कि समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती है – क्या अंधविश्वास और झूठे शक इतने हावी हो सकते हैं कि इंसान निर्दोष की जान ले ले?
पुलिस ने स्पष्ट कहा है कि शेष फरार आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा और नरेश को न्याय दिलाने में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।
यह हत्याकांड केवल एक इंसान की मौत नहीं है, बल्कि अंधविश्वास की अंधेरी गली में खोते इंसानियत की कहानी है। नरेश प्रजापति जैसे समाजसेवी की यादें गांव वालों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगी, लेकिन यह सवाल भी बना रहेगा कि आखिर कब तक झूठे विश्वास और व्यक्तिगत रंजिशें निर्दोषों की जान लेती रहेंगी।













