विधानसभा के शून्यकाल में गूंजा बजरी का मुद्दा

विधायक अशोक कोठारी ने सस्ती व सुलभ बजरी उपलब्ध कराने की उठाई मांग
- रिपोर्ट नरेन्द कुमार रेगर
भीलवाड़ा। राजस्थान विधानसभा के शून्यकाल के दौरान भीलवाड़ा विधायक श्री अशोक कोठारी ने प्रदेश में बजरी की बढ़ती कीमतों, अवैध खनन तथा उससे उत्पन्न हो रही कानून व्यवस्था की गंभीर स्थिति को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश में विकास एवं निर्माण कार्यों की निरंतरता अत्यंत आवश्यक है, लेकिन बजरी की कमी एवं अत्यधिक महंगाई के कारण आमजन, छोटे निर्माणकर्ता और ठेकेदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
विधायक कोठारी ने सदन में कहा कि प्रदेश में एम-सैंड नीति लागू होने के बावजूद सभी प्रकार के निर्माण कार्यों में इसका उपयोग व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। बजरी की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि उसकी आपूर्ति सीमित होने से कीमतें आसमान छू रही हैं। इसी असंतुलन का लाभ उठाकर कुछ तत्व कालाबाजारी एवं अवैध खनन को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे अपराधों में वृद्धि हो रही है और कानून व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि बजरी की अनुपलब्धता के चलते ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मकान निर्माण, सरकारी योजनाओं, सड़क एवं अन्य विकास कार्यों की गति धीमी हो गई है। आम आदमी अपने घर का निर्माण तक नहीं कर पा रहा, जिससे जनता में आक्रोश व्याप्त है।
विधायक कोठारी ने जानकारी देते हुए बताया कि जनहित को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा बजरी नीति-2024 लागू की गई, जिसके अंतर्गत 50 से 100 हेक्टेयर के छोटे क्षेत्रों में 255 बजरी लीजों की पारदर्शी नीलामी की गई। डीएसआर (डिस्ट्रिक्ट सर्वे रिपोर्ट) के आधार पर भीलवाड़ा, टोंक, सवाई माधोपुर एवं अजमेर जैसे जिलों में बजरी खनन की संभावनाएं चिह्नित की गईं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका अपेक्षित लाभ आमजन तक नहीं पहुंच पा रहा है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि बजरी नीति के क्रियान्वयन को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि बजरी सस्ती, सुलभ और वैध रूप से उपलब्ध हो सके। साथ ही अवैध खनन पर सख्ती से रोक लगाई जाए और बजरी परिवहन व वितरण की निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
विधायक अशोक कोठारी ने कहा कि यदि समय रहते बजरी संकट का समाधान नहीं किया गया तो इससे विकास कार्यों पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से इस दिशा में शीघ्र ठोस निर्णय लेने और जनहित में प्रभावी कदम उठाने की मांग की।













