नीरज डांगी को पुनः राज्यसभा भेजने की मांग तेज, जनहित के मुद्दों पर मुखर आवाज

आबूरोड। नीरज डांगी का छह वर्षीय राज्यसभा कार्यकाल जून 2026 में पूरा होने जा रहा है। इससे पहले ही प्रदेशभर में कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और समर्थकों के बीच उन्हें पुनः राज्यसभा में भेजने की मांग तेज होती नजर आ रही है।
समर्थकों का कहना है कि डांगी ने अपने पूरे कार्यकाल में आमजन की आवाज को मजबूती से सदन तक पहुंचाया। युवाओं की बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, मजदूरों के अधिकार, किसानों की फसल और समर्थन मूल्य, महिलाओं की सुरक्षा व सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर उन्होंने लगातार प्रभावी हस्तक्षेप किया। महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर भी उन्होंने केंद्र सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग उठाई।
राजस्थान के हितों से जुड़े विषय—जल संसाधन, आधारभूत ढांचा, उद्योग, पर्यटन और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास—पर भी डांगी की सक्रिय भूमिका रही। उनकी संसदीय भाषा संयमित, तथ्यों पर आधारित और स्पष्ट मानी जाती है, जिससे विपक्ष की एक सशक्त और जिम्मेदार आवाज के रूप में उनकी पहचान बनी।
समर्थकों का मानना है कि डांगी ने केवल राजनीतिक दायित्व ही नहीं निभाया, बल्कि सामाजिक सरोकारों को भी प्राथमिकता दी। विभिन्न जिलों में जनसुनवाई, सामाजिक संगठनों से संवाद और जमीनी स्तर के मुद्दों को समझकर संसद में उठाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता रही है।
इसी सक्रियता और जनप्रतिबद्धता को देखते हुए कार्यकर्ता उन्हें पुनः राज्यसभा भेजने की पुरजोर मांग कर रहे हैं। उनका विश्वास है कि यदि पार्टी नेतृत्व दोबारा अवसर देता है, तो डांगी आने वाले समय में और अधिक प्रभावी ढंग से प्रदेश और देशहित के मुद्दों को सदन में उठाएंगे। प्रदेशभर से मिल रहे समर्थन के बीच यह मांग लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है।













