संयम संवेदना के साथ हृदय प्रदीप’ पुस्तकों का हुआ भव्य विमोचन

भैरु चौक सुमेरपुर
जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी की शुभनिश्रा में श्री वासुपूज्य स्वामी श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ-
भैरुचौक सुमेरपुर की धन्यधरा पर मातुश्री सुन्दरबेन दिनेशकुमारजी रतनपुराचौहान – ‘सौभाग्य सुन्दर परिवार की और से चैत्र मास की शाशवती नवपद ओली निमित्त सौभाग्य सुन्दर नवपद महोत्सव”के आयोजन में आज भी पांचवें दिन साधु पद की आराधना के साथ जैनाचार्यश्री के संयम सुवर्ण वर्ष की अनुमोदनार्थ धर्म सभा में प्रारंभ शिष्य में उनके शिष्य मुनि श्री शालिभद्र विजयजी, एवं मुनिश्री स्थूलभद्र विजयजी ने जैनाचार्यश्री के जीवन प्रसंगों का वर्णन किया।. धर्मसभा में प्रवचन देते हुए जैनाचार्य ने कहा काह कि –
हमे प्राप्त हुआ यह मनुष्य जीवन अत्यंत ही क्षणभंगुर है । जिस यक्ति के साथ हमने कुछ क्षण पहले बाते की हो ,वहीं व्यक्ति कुछ क्षणों के बाद हमे हमेशा के लिए छोडकर चला जाता है । ऐसी घटनाएं संसार में हर दिन बनती ही रहती है। किसी के मरण को जानकर हमे अफसोस होता है, परंतु हम भुल जाता है कि एक दिन अपनी भी मृत्यु होने ही वाली है जीवन में संबंधों का जाल फैलाते हुए वर्षों चले जाते हैं परंतु मृत्यु की एक क्षण सभी संबंधों को तोड देती है। मृत्यु और रोग- बिना बुलाए मेहमान है। मृत्यु किस दिन आकर हमारे जीवन का अंत कर देगी, कोई नहीं जानता। रोग किस दिन आकर हमारे शरीर की सारी शक्ति को क्षय कर देगा , यह भी कोई नहीं जानता है। इसलिए मनुष्य जीवन की क्षणभंगुरता जानकर हमें आत्मा – साधना करने के लिए प्रयतनशील बनना चाहिए। संसार में हर यक्ति स्वतंत्र जीवन जीना चाहता है। स्वतंत्रता सभी को पसंद है परतंत्रता किसी को पसंद नहीं है परंतु सच्ची स्वतंत्रता तो एक मात्र मोक्ष में ही है जहां आत्मा मृत्यु और रोग से सर्वथा मुक्त है कर्म के बंधन से सर्वथा
मुक्त बनने के लिए कर्म का बंधन से स्वस्थ मुक्त बनाने के लिए परमात्मा एवं गुरु की आज्ञा की पराधीनता स्वरूप साधु जीवन का शुभ कार्य स्वीकार करना अनिवार्य है। साधु जीवन के स्वीकार के साथ जीवनभर के लिए हिंसा, झूठा ,चोरी, मिथुन ,और परिग्रह के पापों का त्याग हो जाता है जीव दिया का पालन पूरक जैन जादू भावनगर में पैदल गया करते हैं शिक्षा व्रत से निर्देश आहार लेकर संयम
जीवन का पालन करते हैं नदी की तरह सतत विचरण करते हैं हुए आसपास के क्षेत्र में धर्म प्रदेश के द्वारा धर्म संस्कार का सचिन करते हैं दोपहर 2:00 बजे भक्ति संगीत के साथ संयम संवेदना का कार्यक्रम हुआ ।
चंपापुरी नगरी का पंडाल में 50 किलो चावल से रजोहरण की रंगोली आदि सजावट एवं जैनाचार्य श्री के द्वारा आलिखित पुस्तकों की प्रदर्शनी की गई ।सूरत से पधारे मोन्टु जैन मनसंचालन किया पाली से पधारे संगीतकार महेंद्र भाई भट्ट ने भक्ति संगीत का रमझट मचाई । जैनाचार्य के संयम सुवर्ष वर्ष की अनुमोदनार्थ आयोजन परिवार ने जैनाचार्य को अक्षत वधामणा कर कृतज्ञता व्यस्त की । इस प्रसंग पर बालमुनि श्री विमल पुण्य विजयजी ने जैनचार्य श्री द्वारा लिखी 272 धार्मिक पुस्तकों का धारा प्रवाह से नाम लेकर सभा के मंत्र मुग्ध किया ।
इसी के साथ जैनाचार्य द्वारा आलिखित 271 एवं 272 की पुस्तक हृदय प्रदीप- भाग 1 वह भाग 2 भव्य विमोचन भूतपूर्व विधायक – संयमनजी लोदा, पीकुभाई, जितेन्द्रभाई-चौहान, श्रीसंघ के अध्यक्ष पोपट भाई, वीपुलभाई रुपावत, प्रदीपभाई,
प्रकाशजी, सुरेन्दजी लुणिया, प्रदीप मेहता, युवा मंडल के प्रतिनिधी ।
इस प्रसंग पर राजस्थान के पशुपालन एवं देवस्थान मंत्री -जोरारामजी कुमावत ने जैनाचार्यश्री के दर्शन-वंदन का लाभ लिया।
शाम को 8:00 बजे महेन्द्रभाई भट्ट ने संध्या भक्ति की रमझट मचाई।
दिनांक 30/3/2026 को प्रातः 9:00 प्रवचन एवं दोपहर 3:00 बजे विविध औषधियो के माध्यम से वर्धमान शक्रस्तव महाभिषेक कार्यक्रम हुआ














