आर्य वीर दल के चरित्र निर्माण एवं आत्मरक्षा शिविर के तीसरे दिन बच्चों को सिखाया सर्वांग सुन्दर व्यायाम और बाक्सिग पंच के गुर

पाली। महर्षि दयानन्द सरस्वती व्यायाम शाला लाखोटिया रोड पर चल रहे आर्य वीर दल के चरित्र निर्माण एवं आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिवस बच्चों की संख्या बढ़कर 90 से 110 पहुंच गई। योगाचार्य आर्य हनुमान जांगिड़ द्वारा सर्वांग सुन्दर व्यायाम के तहत भूजबल शक्ति, वक्ष विकासक, स्कन्ध शक्ति विकासक, हस्तपाद शक्ति विकासक, कुक्षि शक्ति विकासक, जानु शक्ति विकासक, पाद शक्ति विकासक आदि का प्रशिक्षण देकर योग आसन करवाये गये।
प्रशिक्षक आर्य भरत कुमावत द्वारा लाठी संचालन के तहत घुमकर सुंदर्शन चक्र की तरह लाठी चलाना, सामने वाले का लाठी प्रहार रोकना, तथा आत्मरक्षार्थ पलटवार करना सहित कई गुर सिखाये गये। बाक्सिग शिक्षक देवेन्द्र मेवाडा एवं विष्णु बंजारा द्वारा बाक्सिग के तहत आज विभिन्न पच के बारे में मुद्राओं के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। कल बाक्सिग मुकाबले मलखंभ एवं रस्सा योग आसन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।सहायक प्रशिक्षक भरतवीर सिंह, टीना आर्या कृष्णा आर्या तनू आर्या का सहयोग रहा।

बौद्धिक सत्र के तहत आर्य वीर दल अध्यक्ष दिलीप परिहार ने बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमारे देश की धरती का नाम देव भूमि है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और योगेश्वर श्रीकृष्ण जी महाराज की क्रीडा स्थली भी यही भूमि है। अपने बल से शत्रुओं का मानमर्दन करने वाले अर्जुन, भीम, हनुमान, बालक भरत, राजनीति के चतुर खिलाड़ी आचार्य चाणक्य, चन्द्रगुप्त, मेवाड़ के गौरव महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, रानी दुर्गावती, महारानी लक्ष्मीबाई, चन्द्रशेखर आजाद, शहीद भगतसिंह, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस् आदि नररत्न इसी भारत भूमि की कोख से उत्पन्न हुये हैं। जिनका नाम लेकर आज भी हम गर्वोन्नत हो जाते हैं।

आर्य वीर दल संरक्षक धनराज आर्य ने बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ जन्म देने वाली माता और जहां हमारा जन्म हुआ है वह मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। इस भूमि माता की धूली में हम घुटनों के बल चले। इसमें उत्पन्न अन्न जल से हमारा पोषण हो रहा है । इसकी सुगन्धित वायु में हम श्वास ले रहे हैं। अन्त समय में भी यह भूमि माता हमें अपनी गोद में आश्रय देती है। इसलिए ‘माता भूमिः पुत्रो ऽहं पृथिव्याः’ वेद की इस वाणी के अनुसार हमे अपनी मातृ भूमि का सम्मान करते हुए इसकी रक्षा का व्रत लेना होगा। गुरुजी गणपत भदोरिया ने भी सम्बोधित किया।
आज बच्चों को काजू बादाम युक्त मीठा हलवा और स्वादिष्ट स्वास्थ्य वर्धक उबले हुए चनों का नास्ता करवाया गया।












