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सिक्किम हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: आरोपी का नाम उजागर करना मीडिया का अधिकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग को मिली मजबूती

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  • लूनिया टाइम्स न्यूज नेटवर्क
गंगटोक। प्रेस की स्वतंत्रता और जिम्मेदार पत्रकारिता को लेकर सिक्किम हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। पत्रिका न्यूज नेटवर्क में प्रकाशित खबर के अनुसार, अदालत ने स्पष्ट किया है कि मीडिया द्वारा किसी आरोपी के नाम का खुलासा करना कानूनन गलत नहीं है, बशर्ते रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित हो।
यह निर्णय जस्टिस भास्कर राज प्रधान की पीठ द्वारा ‘रूदेन शेरपा बनाम सिक्किम राज्य’ मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। अदालत ने कहा कि यदि मीडिया केवल एफआईआर में दर्ज तथ्यों को रिपोर्ट करता है, तो उसे “मीडिया ट्रायल” नहीं माना जा सकता। बल्कि यह समाज के प्रति मीडिया की जिम्मेदारी का हिस्सा है।

मीडिया की भूमिका पर कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी

सिक्किम हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मीडिया समाज का प्रहरी (वॉचडॉग) है और अपराध से जुड़ी सटीक जानकारी जनता तक पहुंचाना उसका कर्तव्य है। न्यायालय ने यह भी माना कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत प्रेस को यह अधिकार प्राप्त है कि वह तथ्यों को सार्वजनिक करे।

संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि प्रेस की आज़ादी लोकतंत्र की मूल आत्मा है और इसे अनावश्यक रूप से सीमित नहीं किया जा सकता।
सिक्किम हाईकोर्ट

निष्पक्ष रिपोर्टिंग की परिभाषा भी स्पष्ट

सिक्किम हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार एफआईआर सार्वजनिक वेबसाइटों पर उपलब्ध होती है। ऐसे में यदि मीडिया इन तथ्यों को साझा करता है, तो इसे निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।

हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि पीड़ित की पहचान को सुरक्षित रखना अनिवार्य है। जब तक पीड़ित की पहचान उजागर नहीं होती, तब तक आरोपी का नाम और आरोप प्रकाशित करना निष्पक्ष रिपोर्टिंग के दायरे में आता है।

प्रेस को कोर्ट में घसीटने पर टिप्पणी

हाईकोर्ट ने यह भी सख्त टिप्पणी की कि केवल पूछताछ या सामान्य आपत्तियों के आधार पर मीडिया संस्थानों को अदालत में घसीटना उचित नहीं है। इससे प्रेस की स्वतंत्रता पर अनावश्यक दबाव बनता है, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।

लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण फैसला

यह निर्णय न केवल मीडिया संस्थानों के लिए राहत भरा है, बल्कि पत्रकारिता के मानकों को भी स्पष्ट करता है। इससे यह संदेश जाता है कि जिम्मेदारी के साथ की गई रिपोर्टिंग न केवल वैध है, बल्कि लोकतंत्र के लिए आवश्यक भी है।
सिक्किम हाईकोर्ट का यह फैसला प्रेस की स्वतंत्रता को मजबूती देने के साथ-साथ मीडिया को उसकी जिम्मेदारियों का भी अहसास कराता है। यह निर्णय भविष्य में मीडिया और न्यायपालिका के बीच संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

न्यूज़ डेस्क

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