खबर का असर – आरणी में गो माता को मिला न्याय, प्रशासन ने सुनी पुकार — धरना-भूख हड़ताल समाप्त, अल्पेश के खून-पत्र और नारायण-अमित की तपस्या से मिली जीत

रिपोर्ट - सत्यनारायण सेन गुरला
गुरलां / राशमी क्षेत्र के आरणी गांव में गोचर भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ चल रहे आंदोलन को आखिरकार सफलता मिली। पांच दिनों तक जारी धरना और भूख हड़ताल के बाद प्रशासन हरकत में आया और पुलिस की सहायता से शंकर घाटा मार्ग सहित गोचर भूमि से अतिक्रमण हटाया गया। यह संघर्ष प्रशासन की अनदेखी के खिलाफ था, जिसे संतों, गोसेवकों और ग्रामवासियों की दृढ़ एकजुटता ने निर्णायक मोड़ दिया।

इस आंदोलन को मीडिया में भी भरपूर समर्थन मिला। विशेष रूप से लुनिया टाइम्स ने चौथे दिन भूख हड़ताल की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसका सीधा असर प्रशासन पर पड़ा और मामला गंभीरता से लिया गया। संबंधित खबर पढ़ने के लिए यह लिंक देखें:
अतिक्रमण के खिलाफ आरणी के ग्रामवासियों द्वारा भूख-हड़ताल का चौथा दिन
इस संघर्ष के दौरान अल्पेश द्वारा खून से लिखा गया पत्र और संत अमित गिरी व नारायण गिरी की भूख हड़ताल ने प्रशासन पर दबाव बढ़ाया, जिससे अंततः गो माता को न्याय मिला और गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया।
इस आंदोलन में अनेक संतों और समाजजनों की सक्रिय भागीदारी रही, जिनमें प्रमुख नाम हैं – अमित गिरी, नारायण गिरी, मनोहर गिरी, राजू गिरी, सत् गिरी, सागर गिरी, शंभु गिरी, नानू गिरी, सोनू सुखवाल, लक्ष्मण सुखवाल, अंबालाल सालवी, प्रकाश जाट, महेश गिरी, शांति गिरी, मदन सालवी, गोपाल गिरी, बद्री तेली, जीवन गिरी, रतन सुखवाल, संपत जाट, सत्तू गदरी, शंकर गदरी, हरीशंकर लोहार, संपत गिरी, कमलेश और भैरू।
सभी की एकजुटता, साहस और निरंतर संघर्ष से यह लड़ाई सफल रही और गो माता को उसका अधिकार तथा सम्मान मिला।












