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पितृ विसर्जन की पवित्र भूमि: मेवाड़ का हरिद्वार क्यों कहलाता है मातृकुंडिया
मेवाड़ क्षेत्र, विशेषकर चित्तौड़गढ़ जिले के लोग, अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन अब हरिद्वार की बजाय मातृकुंडिया में करना अधिक पुण्यकारी मानते हैं।
बनास नदी की निर्मल धारा और परशुरामजी की तपस्थली होने के कारण, यहां अस्थि विसर्जन को मोक्षदायक और आत्मा को परमगति देने वाला माना जाता है।

इसी भावनात्मक आस्था के कारण मातृकुंडिया को आमजन “मेवाड़ का हरिद्वार” कहकर संबोधित करते हैं, जहां पितरों की स्मृति में जल में विलीन होते हुए श्रद्धा, धर्म और संस्कृति का गहन संगम दिखाई देता है।















