राजीविका की महिलाओं ने पारंपरिक उल्लास से मनाई बनीड़ा में बड़ी तीज

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“बनेड़ा में राजीविका की महिलाओं ने परंपरा, भक्ति और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर होकर बड़ी तीज का पर्व उल्लासपूर्वक मनाया।”
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“कजरी तीज के पावन अवसर पर बनेड़ा में महिलाओं की आस्था, श्रृंगार और लोकसंस्कृति की झलक देखते ही बनती थी।”
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“राजीविका की महिलाएं जब मेहंदी रचाकर झूले पर झूलती नजर आईं, तो तीज का पारंपरिक सौंदर्य जीवंत हो उठा।”
बनेड़ा में धूमधाम से मनाई गई बड़ी तीज
बनेड़ा में कजरी तीज का पर्व बड़े पारंपरिक और उल्लासपूर्ण तरीके से मनाया गया। इस मौके पर राजीविका क्लस्टर की महिलाओं ने सोलह श्रृंगार किया, हाथों में मेहंदी रचाई और झूलों पर झूलकर तीज का स्वागत किया। तीज का यह पर्व भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन की स्मृति में मनाया जाता है।
धार्मिक आस्था और पारिवारिक समर्पण का पर्व
इस दिन महिलाओं ने दिनभर व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की तथा अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। विवाहित महिलाओं के लिए यह पर्व विशेष महत्व रखता है, जो माता पार्वती के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
सांस्कृतिक रंगों से सजा बनाड़ा
राजीविका की महिलाओं ने इस अवसर पर पारंपरिक गीतों और नृत्य के साथ तीज का उत्सव मनाया। गांव में उत्सव का माहौल बना रहा, जिसमें सभी आयु वर्ग की महिलाएं रंग-बिरंगे परिधानों में शामिल हुईं। उत्सव में झूले, गीत-संगीत और मेहंदी की महक से पूरा वातावरण खुशनुमा हो गया।
पारंपरिक व्यंजनों की रही धूम
तीज के इस पावन अवसर पर घर-घर में घेवर, मालपुआ, गुजिया, श्रीखंड और खीर जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए गए। महिलाओं ने सामूहिक रूप से त्योहार का आनंद लिया और एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं। इस तरह बनेड़ा में तीज केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक मिलन का भी अवसर बन गई।














