पुत्र प्राप्ति मनोकामना पूरी होने पर सीतादेवी रबारी के घर धूमधाम से मनाया गया कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव

बालोतरा। धार्मिक आस्था और विश्वास का एक अनोखा उदाहरण उस समय देखने को मिला जब सीतादेवी रबारी (पति जोगाराम देवासी, निवासी भीम बेड़ा, हाल बालोतरा) ने अपनी मनोकामना पूरी होने पर अपने घर कृष्ण जन्माष्टमी का महोत्सव बड़ी धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया।
सीतादेवी के परिवार में पहले से ही पांच पुत्रियां थीं। लंबे समय से पुत्र प्राप्ति न होने पर उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से अगली जन्माष्टमी पर पुत्र प्राप्ति की मनोकामना मांगी थी। ईश्वर की कृपा से उनकी यह मनोकामना पूरी हुई और पुत्र रत्न की प्राप्ति के बाद इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी उनके घर पर विशेष रूप से हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।
भक्ति और उल्लास का संगम
बालोतरा स्थित उनके निवास पर जन्माष्टमी महोत्सव के अवसर पर घर और मंदिर को आकर्षक सजावट से सजाया गया।
- भगवान श्रीकृष्ण का पंचामृत स्नान कराया गया।
- सुन्दर वस्त्र और आभूषण पहनाकर ठाकुरजी को भोग लगाया गया।
- महाआरती के साथ पूरे वातावरण में भक्ति रस की धारा बह निकली।
प्रांगण में देर रात तक भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। महिला मंडल और स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भजन संध्या में झूमे श्रद्धालु
भजन गायक कन्या, सुकी, केसी, ममता, सीता, वैसाली, मोती, रामु, कमला, इंद्रा, हंजा, पिंका, सपन, दुर्गा, मीरा, गीता, उर्मिला, दलाजी, देवाजी, केराजी, प्रकाशजी, विष्णा, पवनाजी, मोहन, रतन, जोगा, डीके, सरूपाजी, विराजी, तेजा, पेमजी आदि ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
भजन के दौरान उपस्थित भक्तजन झूमते और नाचते नजर आए। वातावरण में “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” जैसे गगनभेदी जयकारों की गूंज सुनाई दी।
आधी रात का आनंद क्षण
रात 12 बजे जब भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का क्षण आया तो पूरा वातावरण उल्लास और आनंद से भर उठा। भक्तों ने दीप जलाकर और जयकारों के साथ इस पावन क्षण को उत्सव की तरह मनाया।
इसके बाद महाआरती कर प्रसाद वितरण किया गया। बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं, पुरुषों, बच्चों और बुजुर्गों ने भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
विश्वास की मिसाल
स्थानीय लोगों ने कहा कि सीतादेवी रबारी की मनोकामना पूरी होना भगवान श्रीकृष्ण की कृपा और आस्था की अद्भुत मिसाल है। उनका मानना है कि यह उत्सव केवल परिवार का नहीं बल्कि पूरे समाज का उल्लास है, जिसने जन्माष्टमी को और भी खास बना दिया।













