विद्या भारती द्वारा सरस्वती विद्या मंदिर सादड़ी में संकुल स्तरीय बौद्धिक प्रतियोगिता सम्पन्न

सादड़ी, पाली। विद्या भारती के तत्वावधान में सरस्वती विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय सादड़ी में संकुल स्तरीय बौद्धिक प्रतियोगिता का भव्य आयोजन हुआ। यह प्रतियोगिता विद्यार्थियों की बौद्धिक, साहित्यिक और कलात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करने हेतु आयोजित की गई, जिसमें संकुल के अंतर्गत आने वाले विभिन्न विद्यालयों के भैया-बहिनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ परंपरानुसार मां शारदा, ओम प्रतीक तथा भारतमाता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर संकुल के सभी प्रधानाचार्य विशेष रूप से उपस्थित रहे। प्रारंभिक सत्र में विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत संदेश भी प्रदान किए गए।
प्रतियोगिताओं की विविधता
इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का सुनहरा अवसर मिला। कार्यक्रम में निम्नलिखित प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं –
1. सुलेख प्रतियोगिता – जिसमें विद्यार्थियों ने अपनी लेखन कला का प्रदर्शन किया।
2. श्रुतलेख प्रतियोगिता – भाषाई ज्ञान और लेखन गति की परीक्षा ली गई।
3. चित्रकला प्रतियोगिता – राष्ट्रभावना और संस्कृति पर आधारित विषयों पर विद्यार्थियों ने अपने चित्रों के माध्यम से सशक्त संदेश दिए।
4. कविता लेखन प्रतियोगिता – सृजनात्मकता और साहित्यिक गुणों का अनुपम प्रदर्शन देखने को मिला।
5. कहानी लेखन प्रतियोगिता – विद्यार्थियों ने जीवन मूल्यों और समाजोपयोगी विषयों पर रोचक कहानियां प्रस्तुत कीं।
6. अखंड भारत मानचित्र प्रतियोगिता – जिसमें बच्चों ने भारत के सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक स्वरूप को मानचित्र के माध्यम से दर्शाया।
समापन समारोह
प्रतियोगिता का समापन प्रबंध समिति के व्यवस्थापक श्री नारायण जी लोहार एवं समिति सदस्य श्री राजेश जी जैन की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री मनोहर लाल सोलंकी ने प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा की। विजयी प्रतिभागियों को प्रबंध समिति के पदाधिकारियों द्वारा सम्मानित कर पुरस्कृत किया गया।
प्रतिभा का मंच और प्रेरणा
इस प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों की प्रतिभा को सामने लाने का कार्य किया तथा उनमें आत्मविश्वास, संस्कार और राष्ट्र के प्रति गौरवभाव को भी जाग्रत किया। आयोजन से यह संदेश स्पष्ट हुआ कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सांस्कृतिक और बौद्धिक गतिविधियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।












