मुंबई की धर्मनगरी भायंदर में परमात्मा की भव्य रथयात्रा एवं जिनशासन के 108 प्रभावक महान पूर्वाचार्यों के मानचित्रों का ऐतिहासिक वरघोड़ा

- भायंदर पश्चिम
मुंबई की धर्मनगरी भायंदर की पुण्यधरा पर जिनशासन के इतिहास में एक अनूठा, अद्वितीय एवं अतुलनीय धार्मिक आयोजन संपन्न होने जा रहा है। इस पावन अवसर पर परमात्मा की भव्य रथयात्रा के साथ-साथ जिनशासन के 108 प्रभावक महान पूर्वाचार्यों के मानचित्रों का भव्य वरघोड़ा आयोजित किया जाएगा, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था, ज्ञान और परंपरा का जीवंत दर्शन कराएगा।
इस विशेष आयोजन के माध्यम से पंजाब के अंबाला शहर की पावन वसुंधरा पर निर्मित अलौकिक चैत्यालय परिसर की शिल्प-स्थापत्य कला का भी भावपूर्ण परिचय कराया जाएगा, जहां मनोहारी पाषाण प्रतिमाएं प्रतिष्ठित होने वाली हैं। भायंदर की धरती पर यह आयोजन जिनशासन की गौरवशाली परंपरा और आध्यात्मिक वैभव को उजागर करेगा।
यह भव्य वरघोड़ा दिनांक 03 जनवरी 2026, शनिवार को प्रातः 8:30 बजे से प्रारंभ होगा। आयोजन की शुभ निश्रा श्री आत्म-वल्लभ-समुद्र-इन्द्रदिन्न-रत्नाकरसुरि समुदाय के क्रमिक पट्टधर एवं वर्तमान गच्छाधिपति श्रुत भास्कर आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय धर्मधुरंधर सूरीश्वरजी महाराज साहेब की पावन प्रेरणा एवं उपस्थिति में संपन्न होगी।

इस अवसर पर गच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय सोमसुंदर सूरीश्वरजी महाराज साहेब, श्री सागर समुदायवर्ती आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय चन्द्रानन्दसागरसुरीश्वरजी महाराज साहेब, पूज्य श्रमण गणनायक आचार्य श्री रश्मिरत्न सूरीश्वरजी महाराज साहेब के प्रशिष्यगण, पूज्य प्रवचन प्रभावक पंन्यास प्रवर श्री चारित्ररत्नविजयजी, पूज्य अध्यात्मयोगी आचार्य भगवंत श्री कलापूर्णसुरि समुदाय के मुनिराज श्री पद्मकलश विजयजी महाराज साहेब, मुनिराज श्री मुक्तिनिलय विजयजी महाराज साहेब सहित भायंदर में विराजमान समस्त साधु-साध्वी वृंद की पावन उपस्थिति रहेगी।
शोभायात्रा का प्रस्थान बावन जिनालय जैन मंदिर, भायंदर पश्चिम से प्रातः 8:30 बजे होगा, जो अग्रवाल ग्राउंड, तेरापंथ भवन के पास, मांडवी तलाव रोड होते हुए भायंदर पश्चिम में सम्पन्न होकर गुणानुवाद सभा में परिणित होगी। सभा के पश्चात प्रवचन एवं स्वामीवात्सल्य का आयोजन भी रखा गया है।
आयोजकों ने गच्छ, पंथ, संप्रदाय और समुदाय के भेद से ऊपर उठकर सभी जिनशासन अनुरागियों से इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में सहभागी बनने की सविनय प्रार्थना की है।
निवेदक
आत्म-वल्लभ गुणानुरागीगण
जैनम् जयति शासनम्















