ऐतिहासिक धरोहर संजोये हुए है पडरिया तुला का धनुष यज्ञ मेला।ट्रस्ट की जमीन तथा बाग बगीचे धीरे धीरे हो रहे गायब।

विकास क्षेत्र बिजुआ का एक गांव है पड़रिया तुला जहां पर एक ठाकुरद्वारा का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है जिसका पौराणिक महत्व है और इसके बारे में कई मान्यताएं भी हैं महारानी सूरज कुंवरि बिजुआ स्टेट की महारानी थी उनके राज में यह मंदिर स्थापित किया गया था इसके उपरांत यहां पर धनुष यज्ञ मेला लगने लगा जिसकी वजह से गांव और मंदिर बहुत प्रसिद्ध हो गया मंदिर में एक पवित्र तीर्थ स्थल भी है तथा हर साल भव्य मेले का आयोजन भी किया जाता है मेले में बड़े-बड़े झूले तथा रामलीला व मौत का कुआं तथा अन्य कई व्यवस्थाएं आकर्षण का केंद्र रहती हैं। मंदिर के वर्तमान सर्वराकार पुनीत कुमार सक्सेना ने बताया की इससे पहले हमारे पिताजी वीरेंद्र कुमार सक्सेना तथा उनके पहले हमारे पूर्वज मंदिर तथा मंदिर के अंतर्गत आने वाली संपत्ति आदि की देख रेख सैकड़ो साल से करते आ रहे हैं।तथा उन्ही की विरासत में मेले का आयोजन शुरू हुआ था जो की अभी तक लगता आ रहा है।ये मेला लगभग एक महीने तक लगातार चलता है।

मेले में दूर दूर से दुकानदार तथा आसपास के दर्जनों गांव के लोग मेला देखने के लिए आते हैं तथा।मेले की तैयारियां पूरी हो चुकी है मंदिर का सौंदर्य करण का कार्य तथा दुकानदारों को दुकानें आवंटित की जा सकती हैं सभी दुकानदार अपनी दुकान लगा भी रहे हैं इसी मेले के चलते गांव को लोग मेले वाली पडरिया के नाम से पहचानते हैं।ग्रामीणों के अनुसार पहले मंदिर के अंतर्गत एक रामबाग तथा लक्ष्मण बाग समेत सैकड़ो एकड़ कृषि योग्य जमीन थी।जो कि जिम्मेदारों के चलते अब लगभग धीरे धीरे आबादी में तब्दील हो गई है। जिसके चलते मंदिर धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोता जा रहा है।













