तहसील गेट पर यातायात व्यवस्था पूर्ण रूप से ध्वस्त अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और पुलिस निष्क्रियता पर उठ रहे गंभीर सवाल

तहसील गेट पर यातायात व्यवस्था पूर्ण रूप से ध्वस्त
अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और पुलिस निष्क्रियता पर उठ रहे गंभीर सवाल
रिपोर्ट : विशाल कुमार गौतम, जौनपुर
मछलीशहर (जौनपुर)। तहसील गेट के सामने मुख्य मार्ग पर प्रतिदिन लगने वाला भारी जाम अब सिर्फ एक सामान्य असुविधा नहीं बल्कि स्थानीय प्रशासन और नगर पंचायत की गंभीर लापरवाही का बड़ा प्रमाण बन चुका है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि दो से तीन घंटे तक सड़क का बंद हो जाना आम बात हो गई है। इससे एंबुलेंस, स्कूली बच्चे, परीक्षार्थी, नौकरीपेशा लोग और आम नागरिक सभी प्रतिदिन त्रस्त रहते हैं।
अतिक्रमण और अवैध पार्किंग से सड़क का अस्तित्व समाप्त
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क के दोनों किनारों पर ठेला–खोमचा संचालकों, दुकानदारों और रेहड़ी वालों ने मनमाने तरीके से अतिक्रमण कर रखा है। कई दुकानें तो सड़क तक फैली हुई हैं, जिससे वाहन चालकों के लिए रास्ता ही नहीं बचता।
बात केवल अतिक्रमण तक ही सीमित नहीं—टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर चालकों की अवैध पार्किंग ने मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है। दोनों तरफ खड़े वाहनों के कारण सड़क का असली उपयोग लगभग समाप्त हो चुका है।
दुकानदारों या राहगीरों द्वारा वाहन हटाने की बात कहने पर आए दिन विवाद और मारपीट की नौबत भी बन जाती है। ऐसी स्थिति में आम नागरिक स्वयं को असहाय महसूस कर रहे हैं।
ट्रैफिक पुलिस की गैरमौजूदगी पर गंभीर सवाल
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस का मौके पर न होना स्थिति को और भयावह बना रहा है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई न करना, नो-पार्किंग जोन लागू न करना, तथा यातायात को नियंत्रित करने में पुलिस की उदासीनता को लोग ‘कर्तव्यहीनता’ मान रहे हैं।
कई नागरिकों ने यह तक कहा कि यदि यह मामला किसी भी संवेदनशील न्यायिक समीक्षा में जाए, तो इसे पुलिस प्रशासन की घोर लापरवाही माना जाएगा।

स्कूली बच्चों और मरीजों की जान खतरे में, अभिभावकों में तीखा आक्रोश
भीषण जाम के कारण सुबह व शाम के समय स्कूल जाने वाले बच्चों को घंटों इंतज़ार करना पड़ता है। कई बार परीक्षार्थी अपने परीक्षा केंद्रों तक समय पर नहीं पहुँच पाते जिससे उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।
सबसे गंभीर स्थिति तब होती है जब एंबुलेंस जाम में फँस जाती है। कई बार मरीजों की हालत गंभीर हो जाती है, लेकिन रास्ता न खुलने के कारण समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिल पाती। अभिभावक और परिजन इसे सीधे-सीधे “प्रशासनिक विफलता” बता रहे हैं।
न्यायालय जैसी कठोर कार्रवाई की मांग
क्षेत्रवासियों में आक्रोश इतना बढ़ चुका है कि वे उच्चाधिकारियों से जल्द कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि—
- नियमित रूप से अतिक्रमण हटाया जाए,
- नो-पार्किंग जोन प्रभावी रूप से लागू हो,
- ट्रैफिक पुलिस की निरंतर तैनाती सुनिश्चित की जाए,
अन्यथा वे इस मामले को न्यायिक हस्तक्षेप हेतु आगे बढ़ाने को बाध्य होंगे।
स्थानीय लोगों की टिप्पणी
मछलीशहर की वर्तमान यातायात स्थिति सिर्फ एक स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब प्रशासन अपने मूल कर्तव्यों से विमुख हो जाता है, तब साधारण सड़क भी नागरिकों के लिए ‘कानूनी संघर्ष’ का मैदान बन जाती है।
इस समस्या का समाधान केवल कागज़ी कार्रवाई से संभव नहीं। इसके लिए प्रशासनिक दृढ़ता, स्पष्ट नीतियाँ और जवाबदेही की आवश्यकता है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो कोई बड़ा हादसा इस लापरवाही की कड़ी कीमत बन सकता है।













